
सत्ता और भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ सच लिखना अब मानों गुनाह बन गया है! सरगुजा से लेकर पूरे प्रदेश में पत्रकारों और एक्टिविस्टों को डराने-धमकाने और सोशल मीडिया पर उनका चरित्र हनन करने का गंदा खेल चल रहा है।
इसी के विरोध में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने हुंकार भरी है। जिलाध्यक्ष नरेश चौहान की अगवाई में पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक (SP) को ज्ञापन सौंपा और पुलिस महानिदेशक (DGP) से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नरेश चौहान (जिलाध्यक्ष, ABPSS):
“कलम पर पाबंदी लगाने वाले सुन लें, सच बिकेगा नहीं और कलम झुकेगी नहीं। तथ्यों पर बात करने के बजाय पत्रकारों के मान-सम्मान पर हमला किया जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
पत्रकारों ने प्रशासन के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें:
सिंडिकेट की जांच: पत्रकारों और एक्टिविस्टों को टारगेट करने वाले माफियाओं व ट्रोल्स पर सख्त जांच हो।
सुरक्षा की गारंटी: निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों को पुख्ता सुरक्षा और भयमुक्त माहौल मिले।
गैर-जमानती कार्रवाई: सोशल मीडिया पर फेक नैरेटिव गढ़ने और धमकियां देने वालों को सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाए।
बता दें कि इसी मामले में बिलासपुर में संगठन के प्रदेश नेतृत्व ने भी मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा से हस्तक्षेप की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष नरेश चौहान, कोषाध्यक्ष पिंग्धवज खांडेकर, समीप अनंत, युवराज निराला, गुलशन लहरे, शंभु पटेल, तुलसीदास महंत और संतोषी तेंदुलकर समेत कई पत्रकार साथी मौजूद रहे।








