जांजगीर चांपा

धान का कटोरा या शोषण का अड्डा? जांजगीर-चांपा के भुइँगांव में किसानों से अवैध वसूली।

अन्नदाता पर भारी भ्रष्टाचार की मार! भुइँगांव समिति में तौल से लेकर सिलाई तक किसानों का शोषण

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन इसी कटोरे के अन्नदाता आज सिस्टम की भेंट चढ़ रहे हैं। ताजा मामला जांजगीर-चांपा जिले के सेवा सहकारी समिति भुइँगांव से सामने आया है, जहां प्रभारी प्रबंधक और खरीदी प्रभारी घृतेश सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। नियमों को ताक पर रखकर किसानों से न केवल अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, बल्कि उनसे मजदूरी का काम भी कराया जा रहा है।”

समिति प्रबंधक घृतेश सिंह

“जांजगीर-चांपा के भुइँगांव खरीदी केंद्र में इन दिनों नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि प्रभारी प्रबंधक घृतेश सिंह की नाक के नीचे किसानों का खुला शोषण हो रहा है।

किसान

पॉइंट 1: तौल में हेराफेरी
नियमतः धान की एक बोरी का वजन निर्धारित मानक के अनुसार होना चाहिए, लेकिन भुइँगांव में किसानों से प्रति बोरी 41 किलो 500 ग्राम धान लिया जा रहा है। यानी हर बोरी पर किसानों से अतिरिक्त धान की अवैध वसूली की जा रही है।

किसान

पॉइंट 2: किसान बने मजदूर
हैरानी की बात तो यह है कि खरीदी केंद्र में हमालों और मजदूरों का काम भी किसानों को ही करना पड़ रहा है। धान की बोरी पलटी करने से लेकर बोरों में समिति की सील (Stamp) लगाने तक का काम खुद किसान कर रहे हैं। जिस काम के लिए समिति को राशि मिलती है, वह काम किसानों के मत्थे मढ़ दिया गया है।”

पीड़ित किसान

बाइट – किसानों का कहना है-
“साहब, हम यहां धान बेचने आते हैं या मजदूरी करने? हमसे 41.500 किलो धान लिया जा रहा है। बोरी पलटी भी हमें ही करनी पड़ रही है और सील भी हम खुद लगा रहे हैं। विरोध करने पर धान नही खरीदने की धमकी दी जाती है।”

“इस पूरे मामले में खरीदी प्रभारी घृतेश सिंह की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। प्रबंधक का कहना सब किसान झूठ बोल रहे है….ऐसा कुछ नहीं है…।

किसानों का आरोप है कि बिना किसी डर के यहां भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग इस ओर ध्यान देगा? आखिर कब तक पसीने की कमाई को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाते रहेंगे ये किसान?”

“भुइँगांव की यह तस्वीरें सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं। अब देखना होगा कि खबर दिखाए जाने के बाद दोषी प्रभारी पर क्या कार्रवाई होती है या फिर अन्नदाता यूं ही सिस्टम के आगे बेबस बना रहेगा।

हम बहुत जल्द इस पर भाग 2 वीडियो समाचार प्रसारित करेंगे….

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