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सुरों की ‘आशा’ हुई मौन: संगीत के आसमान का एक सुनहरा सूरज अस्त, अलविदा आशा ताई!

CG MEDIA TV:भारतीय संगीत के आकाश का वो सितारा आज ओझल हो गया, जिसने सात दशकों तक अपनी आवाज़ से हिंदुस्तान की धड़कनों को सुरों में पिरोया। सुरों की रानी, सबकी प्रिय ‘आशा ताई’ यानी आशा भोसले जी अब हमारे बीच नहीं रहीं। यह खबर सिर्फ संगीत जगत के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस शख्स के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है जिसने उनके गीतों में अपनी खुशियां और गम ढूंढे हैं।

जब आशा जी ने संगीत की दुनिया में कदम रखा, तो उनके सामने बड़ी बहन लता मंगेशकर की एक हिमालय जैसी शख्सियत थी। लेकिन आशा जी ने नकल करने के बजाय अपनी एक अलग राह चुनी। उन्होंने साबित किया कि ‘वर्सेटिलिटी’ (बहुमुखी प्रतिभा) किसे कहते हैं।

पंचम दा के साथ वो जादुई दौर
आशा जी और आर.डी. बर्मन (पंचम दा) की जोड़ी ने संगीत को आधुनिक बनाया। ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, और ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’ जैसे गानों ने भारतीय फिल्म संगीत को एक नई दिशा दी। उनकी आवाज़ में वो खनक थी, जो आज भी कानों में मिश्री की तरह घुल जाती है।

आशा ताई की यादें उनके हजारों गानों में कैद हैं। उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने गाकर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बनाया। लेकिन उनका असली रिकॉर्ड लोगों के दिलों में है। हर वो धड़कन जो प्यार में है, या वो टूटा हुआ दिल जो तसल्ली ढूंढ रहा है, आशा जी की आवाज़ में अपना सुकून पाता है।

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