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बस्तर में बदलाव की बयार: 18 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, थामी विकास की डोर

CG MEDIA TV:बस्तर में ‘पुना नारगोम’ अभियान की बड़ी सफलता: 18 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में हुए शामिल।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आज 18 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। ‘पुना नारगोम’ यानी ‘नई सुबह, नई शुरुआत’ के तहत इन कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

पुनर्वास से पुनर्जीवन: आज आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में, जिसे ‘पुना नारगोम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नाम दिया गया, 18 माओवादी सदस्यों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों के सामने सरेंडर किया।


तस्वीरें दे रही हैं गवाही: वायरल हो रही तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के हाथों में अब बंदूकें नहीं, बल्कि पुनर्वास सहायता और नई जिंदगी की चाबी है। मंच पर बस्तर पुलिस और विभिन्न सुरक्षा बलों (जैसे DRG, STF, और CRPF) के अधिकारी मौजूद रहे।


क्यों बदल रहा है मन? जानकारों का मानना है कि अंदरूनी इलाकों में खुल रहे नए कैंप और ‘नियद नेल्लानार’ जैसी योजनाओं ने नक्सलियों के आधार को कमजोर किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन सदस्यों को अब शासन की पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

बस्तर में लगातार हो रहे ये आत्मसमर्पण इस बात का संकेत हैं कि अब वहां की जनता और भटके हुए युवा हिंसा की जगह विकास को चुन रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी कैडर इस रास्ते पर चलेंगे।

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